आपका स्वागत है



कविताओं के इस ब्लाग मे आपका स्वागत है


Friday, October 8, 2010

लोहे का स्वाद

कुछ ऐसी वस्‍तुएं जिनके होने से
आत्‍महत्‍या का अंदेशा था
बदन से उतार ली गई
बेल्‍ट और दाहिने हाथ की अंगूठी
पतलून की जेब में पड़े सिक्‍के
बायें हाथ की घड़ी कि उसमें खतरनाक समय था
जूते और यहां तक गले में लटकती पिता की चेन

अब वे एक हद तक निश्चिंत थे
खतरा उन्‍हें इरादों से था
जिनकी जब्‍ती का कोई तरीका ईजाद नहीं हुआ था
सपनों की तरफ से वे गाफिल थे
और इश्‍क के बारे में उन्‍हें कोई जानकारी न थी

घोड़े के लिए सरकारी लगाम थी
नाल कहीं लेकिन आत्‍मा में ठुकी थी
वह एक लोहे के स्‍वाद में जागती रात थी

लहू सर्द नहीं हुआ था
और वह सुन रहा था
पलकों के खुलने-झुकने की आवाजें
पीछे एक गवाह दरख्‍त था
जिसकी पत्तियां सोई नहीं थीं

एक चिडिया गुजरके अभी गई थी सीखचों से बाहर

और वह उसके परों से लिपटी हवा को
अपने फेफड़ों में भर रहा था
बाहर विधि पत्रों की दुर्गंध थी
बूट जिसे कुचलने मं बेसुरे हो उठे थे
वह जो किताब में एक इंसान था
एक नए किरदार में न्‍याय की अधूरी पंक्तियां जोड़ रहा था

बाहर हंसी थी फरेबकारी की
और कोई उसकी किताबों के वरक चीथ रहा था
मरने की कईं शैलियों के बारे में उसे जानकारी थी
लेकिन वह जीने के नए ढब में था

इस जगह किसी मर्सिए की मनाही थी
वह शुक्रिया अदा कर रहा था चांद का
जो रोशनदान से उतर उसके साथ गप्‍पगो था
बैठकर हंसते हुए उसने कहा
लिखो! न सही कविता-दुश्‍मन का नाम

1 comment:

सुभाष नीरव said...

हिंदी ब्लॉग जगत में आपका प्रवेश एक सुखद अहसास दिलाता है। आपकी कविताओं और कविताओं से इतर आपके लेखन से अब इस ब्लॉग के माध्यम से रू ब रू होने का सहजता से अवसर मिलता रहेगा।
मेरी शुभकामनाएं !
सुभाष नीरव
9810534373
www.kathapunjab.blogspot.com
www.setusahitya.blogspot.com
www.gavaksh.blogspot.com
www.srijanyatra.blogspot.com